दुबई एयर शो में वीरगति को प्राप्त करने वाले विंग कमांडर नमांश स्याल का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ भारत लाया गया। उनके पार्थिव शरीर को IAF के C-130 विमान से भारत लाया गया। उनका पार्थिव शरीर दक्षिणी वायु कमान के बेस पर सैन्य सम्मान के साथ प्राप्त किया गया। औपचारिक श्रद्धांजलि के बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश भेज दिया गया। जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारतीय वायु सेवा ने कहा इस कठिन समय में दक्षिणी वायु कमान के सभी कर्मी शोकाकुल परिवार के साथ खड़े हैं। पाढ़िए भारत मां के इस वीर सपूत के बारे में।
हमीरपुर के सैनिक स्कूल से नमांश ने की थी पढ़ाई
नमांश स्याल की शिक्षा-दीक्षा उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा से पूरी की थी। वे मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां के पटियालकर गांव के निवासी थे। 24 दिसंबर 2009 को नमांश का भारतीय वायु सेना में कमीशन हुआ था। उनकी ट्रेनिक NDA के हंटर स्क्वाड्रन में हुई थी। उन्हें मिग-21 और सुखोई एसयू-30 एमकेआई जैसे विमानों को उड़ाने का अनुभव था।
नमांश की पत्नी IAF में अधिकारी है
शहीद नमांश स्याल की पत्नी भी इंडियन एयर फोर्स में अधिकारी है। उनकी एक सात साल की बेटी है। उनके पिता जगन्नाथ स्याल भी सेना के मेडिकल कोर में अपनी सेवा दे चुके हैं। बाद में उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की। नमांश की मां बीना देवी गृहिणी थीं। विंग कमांडर नमांश स्याल अपनी अनुशासन और उत्कृष्ट सेवा के लिए जाने जाते थे।
बैरल रोल नामक करतब दिखाते हुए नमांश हुए शहीद
दुबई एयर शो के दौरान वे तेजस विमान से ‘बैरल रोल’ नामक करतब दिखाते समय नमांश का तेजस विमान हादसे का शिकार हो गया। इस हादसे में उनकी मौत हो गई। इस दुखद घटना पर भारतीय रक्षा मंत्री और कई उच्च अधिकारीयों ने दुख व्यक्त किया है। नमांश स्याल देश के प्रति अपने समर्पण और साहस के प्रतीक थे। जिनकी शहादत ने भारतीय वायु सेना को गहरा झटका दिया है। उनके परिवार और देश के लिए यह एक बड़ा नुकसान है।



















