पूर्णिया की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ । पूर्णिया कांग्रेस सेवा दल के जिलाध्यक्ष डॉ. एसएम झा ने कांग्रेस के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। त्यागपत्र में डॉ. झा ने पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर विश्वासघात, आंतरिक षड्यंत्र, दलाली तंत्र और सबसे गंभीर रूप से सनातन विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। डॉ. झा ने स्वीकार किया कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी को रसातल से निकालकर बुलंदियों तक पहुँचाया, प्रशासनिक अत्याचार से अकेले लड़ाई लड़ी, लेकिन अंततः पार्टी के अंदर बैठे भस्मासुरों से हार गए।
मैंने कांग्रेस को रसातल से निकालकर आवाम की आवाज बनाने में खुद को झोंक दिया
उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस को रसातल से निकालकर सड़कों, कार्यालयों, थानों में आम अवाम का मजबूत आवाज बनाने में अपने आप को झोंक दिया था। मैंने प्रशासन से नहीं डरा, अकेले दो-दो IAS अधिकारियों से लड़ा, लेकिन बदले में मुझे क्या मिला, आंतरिक षड्यंत्र, विश्वासघात और लगातार अपमान। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना सम्मान, परिवार की खुशियाँ और पेशेवर जीवन को दांव पर लगाया, लेकिन पार्टी में चापलूसों और दलालों की चलती रही। डॉ. झा के इस्तीफ़े ने पूर्णिया कांग्रेस के भीतर की गंदगी को खोलकर रख दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्णिया प्रक्षेत्र के चौदहों प्रखंड अध्यक्षों ने उनके नाम पर सर्वसम्मति से वोट किया, लेकिन पटना-दरबार की दलाल लॉबी ने उनकी उम्मीदवारी को दो बार कुचला, ताकि दलाली का बाजार बंद न हो जाए। सबसे बड़ा आरोप तब लगा जब उन्होंने कहा कि संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता को टिकट न देकर, वह टिकट उस व्यक्ति को दिया गया जो सिर्फ 20 दिन पहले दूसरे दल से कांग्रेस में आया था। इस्तीफ़े का अंतिम और सबसे निर्णायक कारण धर्म बना।
भगवान को गालियां देने पर मेरा धैर्य टूट गया
डॉ. झा ने कहा कि उनका धैर्य तब जवाब दे गया जब जिला कांग्रेस में जबरदस्ती घुसे एक व्यक्ति ने सार्वजनिक मंचों से हमारे सनातन धर्म और हमारे आराध्य भगवानों को गालियां देना शुरू कर दिया। डॉ. एस एम झा ने कांग्रेस को दलाली, अवसरवादिता, नफरत, सनातन विरोधी मानसिकता का पर्याय घोषित करते हुए तत्काल पार्टी से नाता तोड़ लिया। आज मुझे ना सिर्फ अफसोस हो रहा है बल्कि मैं खुद में ग्लानि भी महसूस कर रहा हूं… इसलिए आज अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए, अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिए, अपने आराध्य ईश्वर के सम्मान के लिए, अपना सिर ऊँचा रखते हुए मैं यह निर्णय ले रहा हूँ। उन्होंने घोषणा की कि वह अब किसी पद, कुर्सी या दलाल-तंत्र के फंदे में नहीं बंधेंगे, बल्कि जनता के बीच नई राह, नई लड़ाई और नई ऊर्जा के साथ उतरेंगे। उनका संघर्ष अब सत्य, सनातन एवं समाज कल्याण के पक्ष में होगा।
















