देश के सबसे प्राचीन जिलों में शुमार पूर्णिया में जहां आधुनिक समय में बॉलीवुड गानों पर युवा थिरक रहे हैं। वहीं बीते पांच दशक से एक नृत्यांगना न केवल शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दे रही है। बल्कि अकेले ही पूर्वी भारत के गांव से लेकर शहरी इलाके में सजे मंचों पर कथक नृत्य शैली को सींच रही हैं। जी हां, हम पूर्णिया की रहवासी और कथक नृत्यांगना रचना की बात कर रहे हैं। जिन्हें लोग प्रज्ञा प्रसाद के रूप में भी जानते हैं। रचना पूर्णिया जिला की इकलौती कथक डांसर हैं। जो आज भी न केवल शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति देती हैं बल्कि जिले से लेकर राज्य और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृतिक कार्यक्रमों में जज की भी भूमिका निभाती हैं।

मां से मिली प्रेरणा को चाची ने सांचे में ढाला
रचना बताती हैं कि वे मजह तीन साल की उम्र से कथक नृत्य सीख रही हैं। रचना अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि उन्हें नृत्य करने के लिए उनकी मां प्रभा प्रसाद ने प्रेरित किया। और उनकी चाची किरण गुप्ता ने मां से मिले प्रोत्साहन को सांचे में ढाला। इलाहाबाद की रहने वाली रचना की चाची उनकी प्रारंभिक गुरु थी। उन्होंने ही नन्ही रचना को कथक नृत्य के परन, कवित, तोड़े, तत्तकार, तराना से अवगत कराया। मां से मिले प्रोत्साहन और चाची से मिली ज्ञान की ही बदौलत वे आज पूर्णिया जिले की इकलौती कथक डांसर हैं। आज पूर्णिया ही नहीं बल्कि कोसी और सीमांचल के इलाके में जो ततकार और कथक के नृत्य के भाव दिख रहे हैं वे सब इनके ही घर से निकले हैं।

पद्मश्री गोदई महराज ने भी रचना को किया है प्रशिक्षित
नृत्यांगना रचना बताती है कि उन्होंने पूर्णिया में अपनी चाची किरण गुप्ता के अलावा कलाभवन के मशहूर तबला वादक पंडित बीरेंद्र घोष से नृत्य और तबला बाजने की शिक्षा प्राप्त की है। इन दोनों के अलावा उन्होंने पद्मश्री विजेता पंडित शामता प्रसाद जिन्हें लोग गोदई महराज के नाम से भी जानते हैं, उन्होंने भी रचना को प्रशिक्षित किया है। गोदई महराज ने रचना को बहुत सारे घरानों के बोल सीखाए हैं।
26 साल से डांस स्कूल चला रही है रचना
रचना बीते 26 से अपने गुरु बीरेंद्र घोष और पद्मश्री पुरस्कार विजेता और बनारस घराने के तबलावादक शामता प्रसाद उर्फ गोदई महराज से मिले ज्ञान को बच्चों में बांट रही है। शास्त्रीय नृत्य में पारंगत रचना शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम के सामने स्थित अपने आवास पर डांस स्कूल चलाती हैं। रचना का प्रज्ञा नृत्य कला केंद्र इलाहाबाद से मान्याता प्राप्त है। इस डांस स्कूल से अबतक हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं नृत्य सीख चुकीं हैं।




















