बिहारीगंज थाना क्षेत्र के देवैल वार्ड-8 निवासी 48 वर्षीय बेचन मुखिया की इलाज के दौरान रविवार दोपहर पटना में मौत हो गई। बेचन मुखिया पर करीब दस दिन पहले धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया था। गांव लौटने के बाद शव देखते ही परिजन और ग्रामीण भड़क उठे और योगीराज पथ पर सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक सड़क पूरी तरह बंद रही और यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।
कैसे हुआ हमला?
यह घटना 23 नवंबर की रात की है। बेचन मुखिया अपने घर से करीब 300 मीटर दूर गंभीर हालत में मिले थे। उनके दाहिने पैर को धारदार हथियार से काट दिया गया था और छाती, गर्दन व चेहरे पर कई जगह वार किए गए थे। सूचना मिलने पर 112 पुलिस की मदद से उन्हें बिहारीगंज पीएचसी ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए पटना रेफर कर दिया। लगभग एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज के बाद रविवार को उनकी मौत हो गई।
शव आते ही ग्रामीणों का आक्रोश फूटा
जैसे ही शव गांव पहुंचा, परिजन और ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। उनकी मांग थी कि हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। मौके पर पहुंचे सर्किल इंस्पेक्टर संतोष कुमार गुप्ता, थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह और बीडीओ गुलजारी कुमार पंडित ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण एसडीपीओ के आने पर अड़े रहे। करीब छह घंटे बाद एसडीपीओ अविनाश कुमार मौके पर पहुंचे और परिजनों व ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि नामजद आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद जाम हटाया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा — “दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
तीन लोगों पर हत्या का आरोप
मृतक की बेटी रंजन देवी ने गांव के ही मो.मुजाहिद, मो.नूर आलम, मो.इरफान को नामजद आरोपित बनाया है। उनका कहना है कि घटना से कुछ दिन पहले इनके पिता ने मुजाहिद से देर रात घर आने की वजह पूछी थी। इसी विवाद को लेकर रात में बहाने से बुलाकर आरोपियों ने हमला किया और पुल के पास झाड़ी में फेंक दिया।
परिजनों को मिला आर्थिक सहयोग
बीडीओ गुलजारी कुमार पंडित ने पारिवारिक लाभ योजना के तहत मृतक के परिजनों को 20 हजार रुपये का चेक प्रदान किया। मौके पर कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।
















