बिहार की सियासत में 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की प्रस्तावित ‘वोट चोरी के खिलाफ रैली’ को लेकर राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। इसी बीच बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने इस रैली की संभावित भीड़ को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया है।
अशोक चौधरी ने कहा SIR के खिलाफ रैली में रामलीला मैदान में 5 लाख लोग जुट जाएंगे… बिहार की एक विधानसभा में ही 3.5 लाख मतदाता हैं। इससे (रैली) क्या फर्क पड़ेगा? इससे आप केवल अपने मतदाताओं का मनोबल बढ़ा सकते हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं होगा। उनके इस बयान को सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर हमला माना जा रहा है। मंत्री ने साफ कहा कि रैली से न तो सत्ता समीकरण बदलने वाले हैं और न ही इससे “SIR” (जिसका संदर्भ उन्होंने विपक्षी नेतृत्व के लिए दिया) पर कोई प्रभाव पड़ेगा।
रैली को लेकर सियासी गर्मी
कांग्रेस ने बिहार और देशभर में कथित वोट चोरी, चुनावी अनियमितताओं और लोकतंत्र की सुरक्षा के मुद्दे पर यह रैली बुलाने की घोषणा की है। पार्टी का दावा है कि लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे। हालांकि सत्ता पक्ष इस रैली को पूरी तरह राजनीतिक प्रोपेगेंडा बता रहा है।
क्या कहता है राजनीतिक विश्लेषण?
विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी माहौल में विपक्ष द्वारा आयोजित रैलियां अपने कैडर को उत्साहित करने और मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में लाने का एक तरीका होती हैं, लेकिन सत्ता पक्ष इन रैलियों की प्रभावशीलता को लेकर हमेशा सवाल उठाता रहा है। मंत्री अशोक चौधरी का बयान भी इसी राजनीतिक धारणा को और मजबूत करता है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी सियासी गरमी
14 दिसंबर की रैली को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। कांग्रेस जहां अपने समर्थकों को एकजुट करने में जुटी है, वहीं एनडीए के नेता रैली की प्रासंगिकता और असर पर सवाल उठा रहे हैं। अब सच में रैली कितनी भीड़ खींच पाती है और इसका विपक्ष व सत्ता पक्ष पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह 14 दिसंबर को साफ हो जाएगा।
















