अररिया। द डेमोक्रेसी
जिले में चर्चित शिक्षिका शिवानी वर्मा हत्याकांड का पुलिस ने बड़ा खुलासा कर दिया है। यह हत्या किसी निजी रंजिश का परिणाम नहीं, बल्कि ‘गलत पहचान’ के कारण हुई थी। मामला जितना चौंकाने वाला है, उतना ही दर्दनाक भी। फारबिसगंज की रहने वाली हुश्न आरा को शक था कि उसके पति मो. साकिर का उसी इलाके की एक अन्य महिला शिक्षिका से अवैध संबंध है। पति का यह रिश्ता खत्म कराने और बदला लेने के लिए उसने उस महिला शिक्षिका को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। इसी के तहत हुश्न आरा ने प्रोफेशनल शूटर मो. मारूफ और मो. शोहेल को 3 लाख रुपये की सुपारी दी। अररिया एसपी अंजनी कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जिस शिक्षक रंजीत कुमार वर्मा को नामजद बनाया गया था उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।
ऐसे हुआ कंफ्यूजन
शूटरों को उस दूसरी महिला टीचर के स्कूल जाने का रास्ता, समय और उसके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली स्कूटी की जानकारी दे दी गई थी। लेकिन घटना के दिन अवकाश होने की वजह से वह महिला स्कूल नहीं गई। उसी दौरान शिवानी वर्मा अपनी रोज की तरह स्कूल जाते हुए उसी रास्ते से गुजर रही थीं। उनकी स्कूटी का रंग और मॉडल भी वही था। इसी भ्रम में शूटरों ने उन्हें रोककर गोली मार दी और फरार हो गए। इस तरह एक निर्दोष और सम्मानित शिक्षिका को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पुलिस ने किया चौंकाने वाला खुलासा
अररिया एसपी अंजनी कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया कि हत्या शिवानी वर्मा की नहीं होनी थी। जिस महिला की हत्या की सुपारी दी गई थी, वो बच गई और एक मासूम की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में हुश्न आरा और दोनों सुपारी किलरों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में इस्तेमाल FZ बाइक और एक देसी कट्टा भी बरामद किया गया है। वहीं, इस मामले में नामजद किए गए शिक्षक रंजीत कुमार वर्मा के खिलाफ कोई भी सबूत पुलिस को नहीं मिला है। एसपी ने बताया कि इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। उन्होंने कहा कि यह केस दिखाता है कि एक गलत शक और नफरत कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
















