बिहार की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़! राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने बिना चुनाव लड़े ही मंत्री पद की शपथ ले ली। इस फैसले ने सूबे के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में शामिल किए गए दीपक प्रकाश राजनीति में नए हैं, लेकिन मंत्री पद पाकर वे सुर्खियों के केंद्र बन गए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना चुनाव मैदान में उतरे कोई नेता कैसे सीधे मंत्री बन सकता है।
कौन हैं दीपक प्रकाश?
दीपक प्रकाश का जन्म 22 अक्टूबर 1989 को महनार में हुआ। मणिपाल इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर साइंस में बी-टेक करने के बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की और फिर अपना बिजनेस शुरू किया। राजनीति में वे पिछले कुछ वर्षों से अपने पिता की मदद कर रहे थे, लेकिन सक्रियता बहुत कम थी।
लेकिन मंत्री कैसे बने?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दीपक न तो विधायक हैं और न ही एमएलसी। फिर भी वे मंत्री बन गए। असल में, यह सब एनडीए के सीट-शेयरिंग और सत्ता समीकरणों का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि कुशवाहा के साथ हुए राजनीतिक समझौते के तहत RLM कोटे से उनके बेटे को मंत्री बनाया गया। अब उन्हें छह महीने के भीतर किसी भी सदन की सदस्यता लेनी होगी, वरना मंत्री पद हाथ से चला जाएगा।
क्यों बढ़ा सस्पेंस?
दीपक प्रकाश का नाम किसी भी सूची में नहीं था, न ही वे चुनावी मैदान में कहीं दिखे। अचानक शपथग्रहण सूची में उनका नाम सामने आया और पूरे बिहार की राजनीति में हलचल मच गई। बिहार की सत्ता में यह नया चेहरा अब कितना असर दिखाएगा, और क्या दीपक छह महीने में विधानसभा या परिषद में पहुंच पाएंगे। यह आने वाला वक्त तय करेगा। फिलहाल उनका मंत्री बनना राजनीतिक गलियारों की सबसे बड़ी चौंकाने वाली खबर बन गया है।

















