पुलिस की वर्दी और उस पर टंगी चमचमाती स्टार—किसी को भी भरोसा दिलाने के लिए काफी। लेकिन इसी भरोसे का फायदा उठाकर एक शातिर युवक लंबे समय से ठगी का खेल खेल रहा था। खुद को दरोगा बताकर आम नागरिकों को ठगने वाले इस फर्जी अधिकारी का खेल अब खत्म हो गया है। अररिया की नगर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस फर्जी दरोगा को धर-दबोचा। मामला 24 नवंबर 2025 की दोपहर का है, जब महावीरस्थान परिसर में पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक वर्दी में घूमकर लोगों से धोखाधड़ी कर रहा है। खुफिया इनपुट के बाद नगर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया। कड़ाई से पूछताछ में उसके झूठ की परतें खुलती चली गईं।
कई वर्षों से खुद को दरोगा बताकर ठगी में जुटा था
आरोपी की पहचान रंजीत कुमार, पिता अर्जुन पासवान, उम्र 35 वर्ष, वार्ड-09, थाना-हटिया—मधुबनी (वर्तमान पता: गोविदारी चौक, थाना-फारबिसगंज) के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि वह पिछले कई वर्षों से खुद को पुलिस दरोगा बताकर ठगी में जुटा था। आरोपी ने कबूला कि वह महावीरस्थान परिसर और शहर के कई अन्य इलाकों में वर्दी पहनकर घूमता था और लोगों को जल्द नौकरी दिलाने, केस खत्म कराने और अन्य कामों का झांसा देकर मोटी रकम वसूलता था। जब पुलिस ने उसकी वर्दी की सच्चाई जांची तो बड़ा खुलासा हुआ—वह दरोगा नहीं, बल्कि फर्जी वर्दीधारी ठग था! मौके से एक पुलिस वर्दी, एक नकली पिस्टल, और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।
मजबूरी का फायदा उठाकर हजारों-लाखों ऐंठ लेता
सूत्रों की मानें, आरोपी की नजर अक्सर उन गरीब और असहाय लोगों पर रहती थी, जिन्हें पुलिस की जरूरत होती है। वर्दी के रौब में वह उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर हजारों-लाखों ऐंठ लेता था। कई महीनों से उस पर पुलिस की गुप्त नजर थी। जैसे ही ठोस सुराग हाथ लगे—ऑपरेशन शुरू हुआ और पूरा गिरोह उजागर हो गया। इसके खिलाफ नगर थाना कांड संख्या 473/25 दर्ज की गई है। IPC की कई गंभीर धाराओं (धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, प्रतिरूपण आदि) में मामला दर्ज हुआ है। आरोपी के आपराधिक इतिहास की जांच भी जारी है। पुलिस को शक है कि इस पूरे खेल में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। नगर थाना पुलिस का कहना है कि आम जनता अगर किसी संदिग्ध वर्दीधारी से सामना करे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।




















