अमृत समान माना जाने वाला मां का दूध अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गया है। एक बेहद हैरान करने वाले शोध में खुलासा हुआ है कि पानी के बाद अब मां के दूध (ब्रेस्ट मिल्क) में भी यूरेनियम की मौजूदगी है। यह गंभीर चिंता का विषय बन गया है। जी हां, आप बिल्कुल ठीक पढ़ रहे हैं। शोधकर्ता पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान ने दुनिया में पहली बार इस मुद्दे पर शोध किया है। इस रिसर्च में एम्स दिल्ली, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सहित कुल पांच संस्थान शामिल थे। जिसे आईसीएमआर ने फंड किया था।
छह जिले की 40 महिलाओं का लिया गया था सैंपल
अक्टूबर 2021 से 2024 के बीच बिहार के छह जिलों (भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा) की 40 महिलाओं के दूध के सैंपल की जांच की गई। रिसर्च विभाग के एचओडी डॉ.अशोक कुमार घोष ने बताया कि जांच में पाया गया कि सभी 40 महिलाओं के दूध में यूरेनियम मौजूद था। यूरेनियम का औसत स्तर 4.035 माइक्रोग्राम प्रति लीटर पाया गया। कटिहार जिले में सबसे अधिक मात्रा 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई।
बच्चों के खून में भी यूरेनियम की उपस्थिति
इससे भी भयावह तथ्य यह है कि जिन 40 माताओं के दूध में यूरेनियम मिला। उनके 35 बच्चों के खून की जांच की गई। जांच में सामने आया कि लगभग 70 फीसदी बच्चों के खून में भी यूरेनियम की मौजूदगी पाई गई। यह दर्शाता है कि यूरेनियम अब केवल पानी और खाद्य पदार्थों में ही नहीं, बल्कि मां के दूध और नवजात शिशुओं तक में पहुंच चुका है।
स्वास्थ्य पर संभावित खतरा
डॉ.अशोक कुमार घोष के अनुसार यूरेनियम की अधिक मात्रा से गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। यह कैंसर का एक प्रमुख कारक भी माना जाता है। बच्चों में यूरेनियम के सेवन से याददाश्त और आईक्यू प्रभावित हो सकते हैं। शारीरिक विकास और किडनी के कार्य पर असर पड़ सकता है। उच्च स्तर पर कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
सुरक्षा मानक और अपील
पीने के पानी में यूरेनियम की सुरक्षित मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि डॉ.घोष ने बताया कि मां के दूध में यूरेनियम की सुरक्षित मात्रा के लिए अभी तक कोई मानक निर्धारित नहीं किया गया है। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि यह स्तर खतरनाक है या नहीं। चूंकि किसी भी महिला या बच्चे में तत्काल कोई लक्षण नहीं दिखा है, इसलिए विशेषज्ञ आगे और शोध की आवश्यकता बता रहे हैं। यूरेनियम के स्रोत का पता लगाने के लिए महिलाओं के घरों से पानी के सैंपल की जांच की जा रही है।
चिकित्सकीय अपील
मेडिकल डायरेक्टर डॉ.मनीषा सिंह ने लोगों से पैनिक न होने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि मां का दूध बच्चों के लिए अमृत समान है और यह मात्रा कितनी हानिकारक है, यह अभी तय नहीं हुआ है। उन्होंने माताओं से पहले की तरह ही अपने बच्चों को दूध पिलाते रहने का आग्रह किया है, क्योंकि शोध किसी तत्काल खतरे की ओर संकेत नहीं करता।
















