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लालू यादव और राबड़ी देवी(फाइल फोटो)

IRCTC टेंडर घोटाला: राउज एवन्यू कोर्ट में लालू-राबड़ी-तेजस्वी पर आरोप, राबड़ी देवी की जज बदलने की मांग

दिल्ली । द डेमोक्रेसी

दिल्ली की राउज एवन्यू कोर्ट में चल रहे IRCTC टेंडर घोटाला मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले के स्पेशल जज विशाल गोगने को हटाने की मांग की है। IRCTC टेंडर घोटाला मामला अभी भी कोर्ट में सुनवाई के दायरे में है, जहां राबड़ी देवी की याचिका और कोर्ट की उससे संबंधित कार्रवाई का आगे परिणाम महत्वपूर्ण होगा। यह मुकदमा न केवल राजनीतिक हलकों में बल्कि न्याय की दृष्टि से भी काफी संवेदनशील बना हुआ है और आने वाले समय में इसका फैसला बिहार की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।​

यह मामला IRCTC के दो होटलों (BNR Ranchi और BNR Puri) के टेंडर आवंटन में हुए कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसका खुलासा 2017 में CBI ने किया था। आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए इस टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात और धांधली की गई, जिससे Sujata Hotels Pvt. Ltd. को फायदा पहुंचाया गया।​

दिल्ली की राउज एवन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कई आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और साजिश के तहत आरोप तय किए थे। कोर्ट ने 27 अक्टूबर से गवाहों की सुनवाई शुरू कर दी थी और मुकदमे की सुनवाई बेहद तेज़ गति से हो रही है, जिसके कारण लालू यादव और राबड़ी देवी ने दिन-प्रतिदिन की सुनवाई रोकने के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।​ अदालत ने कहा कि तेज न्यायिक प्रक्रिया के लिए दिन-प्रतिदिन सुनवाई आवश्यक है, खासकर सांसदों और विधायकों के मामले में।​

राबड़ी देवी ने न्यायाधीश विशाल गोगने के विरुद्ध पक्षपात और पूर्वग्रह की शिकायत करते हुए उनके खिलाफ लंबित अन्य चार मामलों को भी स्थानांतरित करने की मांग की है।​ उनका कहना है कि जज गोगने उनके खिलाफ पूर्वनिर्धारित तरीके से काम कर रहे हैं और मामले का निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं।​ इस याचिका पर अदालत जल्द सुनवाई करेगी, जो मुकदमे की दिशा को प्रभावित कर सकती है।

CBI ने आरोप लगाया है कि लालू यादव ने रेलवे बोर्ड के निर्णयों में गड़बड़ी कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे Sujata Hotels को अनुचित लाभ मिला।​ टेंडर दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां थीं, जिसमें कई काल्पनिक बोलीदाता दिखाए गए और बोली प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं।​ बदले में यादव परिवार को पटना में तीन एकड़ की सरकारी जमीन विशेष दर पर मिली, जो कथित रिश्वत का हिस्सा मानी जाती है।​

यह मामला बिहार की राजनीति में बड़ा दबाव बनाता जा रहा है, विशेष रूप से चुनावों के समय।​ आरोप लगाने वाले पक्ष इस मुकदमे को राजनीतिक साजिश मानते हैं, जबकि पक्षकार इसे न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए सही तथ्य उजागर करने की बात कहते हैं।​

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