भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार रविवार को पूर्णिया पहुंचे, जहां उन्होंने विद्या विहार समूह एवं ब्रजेश ऑटोमोबाइल्स के संस्थापक स्वर्गीय रमेश चंद्र मिश्र की 74वीं जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने पूर्णिया के सकारात्मक माहौल की खुलकर तारीफ की और छात्रों को खेल व शिक्षा के संतुलन पर महत्वपूर्ण संदेश दिए।बिहार के गोपालगंज से ताल्लुक रखने वाले मुकेश कुमार ने कहा कि पूर्णिया आकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह किसी बाहरी शहर में हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों के व्यवहार, संस्कार और संवाद शैली की सराहना की। उन्होंने विद्या विहार स्कूल की प्रगति की कामना करते हुए कहा कि “यहां के बच्चों में अद्भुत प्रतिभा दिख रही है, जो भविष्य में क्रिकेट के बड़े मंच पर चमक सकते हैं।
छात्रों को दिया दो महत्वपूर्ण मंत्र

युवा खिलाड़ियों और छात्रों को प्रेरित करते हुए मुकेश कुमार ने दो प्रमुख बातों पर जोर दिया मेहनत के साथ पढ़ाई भी जरूरी। उन्होंने कहा कि खेलकूद जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी पढ़ाई का साथ होना भी है।
जीवन में हमेशा विकल्प रखें
मुकेश का मानना है कि विकल्प होने से निराशा नहीं आती। उन्होंने कहा इधर नहीं होगा तो उधर जरूर होगा। मेहनत करोगे तो IPL तक पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने छात्रों से जमीन से जुड़े रहने, भविष्य की प्लानिंग करने और निरंतर प्रयास करते रहने की अपील की।
जयंती समारोह और क्रिकेट फाइनल
समारोह की शुरुआत में मुकेश कुमार ने परोरा स्थित विद्या विहार स्कूल एवं ब्रजेश ऑटोमोबाइल्स के संस्थापक स्व. रमेश चंद्र मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। विद्या विहार समूह के सचिव राजेश चंद्र मिश्र ने संस्थापक के शिक्षा-दर्शन और मूल्यों को याद किया। समारोह का मुख्य आकर्षण रहा क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल, जिसमें विद्या विहार आवासीय विद्यालय ने रोमांचक मुकाबले में डीएवी कहलगांव को 19 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार चैंपियनशिप जीती। मुख्य अतिथि मुकेश कुमार ने विजेता टीम को 60,000 रुपये नकद और ट्रॉफी, जबकि उपविजेता टीम को 40,000 रुपये नकद व ट्रॉफी प्रदान की। सेमीफाइनल में पहुंची दोनों टीमों को 15,000-15,000 रुपये दिए गए।
युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा
मुकेश कुमार का यह दौरा पूर्णिया के उभरते खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है। छोटे शहर से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचने की उनकी कहानी यहां के युवाओं के लिए उम्मीद, मेहनत और बेहतर भविष्य का संदेश देती है।


















