भागलपुर के सृजन घोटाले में सीबीआई कोर्ट का पहला बड़ा फैसला सामने आया है। पटना स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सृजन घोटाले के केस संख्या 11A/17 में फैसला करते हुए तीन आरोपियों को सजा सुनाई है। इस घोटाले की केंद्र की राशि लगभग 13 करोड़ रुपये थी, जो सरकारी खजाने से गैरकानूनी तरीके से निकालकर एक गैर सरकारी संगठन सृजन महिला विकास समिति लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर की गई थी।सीबीआई कोर्ट ने भागलपुर जिलाधिकारी कार्यालय के तत्कालीन नाजीर अमरेंद्र कुमार यादव और बैंक कर्मी अजय कुमार पांडे को 4 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन सहायक प्रबंधक राकेश कुमार को 3 वर्ष की सजा मिली है।
आरोपियों को कोर्ट ने लगाया जुर्माना
इसके अलावा, अदालत ने तीनों आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया है। अमरेंद्र कुमार यादव को 14 लाख, अजय कुमार पांडे को लगभग 6 लाख २५ हजार और राकेश कुमार को 2.5 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा।यह मामला 2017 में उजागर हुआ था, जब यह पता चला कि सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए बांका और भागलपुर कोषागार की राशि सृजन महिला विकास समिति के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इस घोटाले में सरकारी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और एनजीओ संचालकों की मिलीभगत शामिल रही। शुरुआती जांच पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में इसे गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) को सौंप दिया गया था।सीबीआई की विशेष अदालत के जज सुनील कुमार ने इस मामले में यह फैसला सुनाया है, जिसे न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
38 गवाहों के बयान के आधार पर सुनाई गई सजा
अदालत ने कुल 38 गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को आधार बनाकर यह सजा सुनाई है। इस फैसले से सृजन घोटाले के अन्य लंबित मामलों में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।सृजन महिला विकास समिति नामक संस्था महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देती थी, लेकिन इस घोटाले में सरकारी कल्याणकारी निधि का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार उजागर हुआ। यह मामला बिहार का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है, जिसकी जांच और मुकदमा चल रहा है।इस पहले फैसले के बाद उम्मीद है कि अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जल्द सख्त कार्रवाइयां होंगी और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को कड़ी सजा मिलेगी। यह फैसला कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय की दिशा में बड़ा संदेश है।

















